Home Latest News विकास की पहली और अनिवार्य शर्त है शिक्षा- श्री दत्त
विकास की पहली और अनिवार्य शर्त है शिक्षा- श्री दत्त

छत्तीसगढ़ राज्य के महामहिम राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज, राज्य अथवा राष्ट्र के विकास की पहली और अनिवार्य शर्त है। नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से शिक्षा का विकास हो रहा है। राज्य बनने के बाद यहां अनेक नये विश्वविद्यालय व महाविद्यालय बने। शिक्षा के विस्तार का लाभ यहां के विद्यार्थियों के साथ पूरे प्रदेश को मिलेगा। महामहिम राज्यपाल श्री शेखर दत्त कल्याण महाविद्यालय सेक्टर- 7 भिलाई के सभाकक्ष में आयोजित छत्तीसगढ़ कल्याण समिति  भिलाई के स्वर्ण जयंती समारोह को सम्बोधित करते  हुए उक्ताशय के उद्गार व्यक्त किए। समारोह में पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. एस. के. पाण्डेय  एवं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी भी मौजूद थे।

राज्यपाल श्री दत्त ने विकास में युवाओं के योगदान हेतु उनके सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है और यहां दक्ष और प्रतिभावान मानवीय संसाधन तैयार करने की अपार क्षमताएं हैं। युवाओं को देश का वर्तमान और भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में युवाओं के सशक्तिकरण में हमें अपनी सम्पूर्ण साधन उपलब्ध कराने होंगे। युवाओं को उनके कैरियर बनाने के लिए उचित मार्गदर्शन देने यहां प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी  बहुत बड़ी चुनौतियां है। ऐसे में कैपिटल एसेंट का पूरा उपयोग होना चाहिए। कैपिटल एसेंट का उपयोग कर हम समाज में प्रशिक्षित व्यक्तियों के कमी को पूरा  करें। राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सबसे अधिक मांग है। यहां पर प्राथमिक से लेकर महाविद्यालयीन शिक्षा का मुख्य जोर उनकी गुणवत्ता को बढ़ाने पर होना चाहिए। महामहिम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक संसाधनों  से परिपूर्ण है। यहां के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का समुचित दोहन हो तथा इसके लिए जरूरी है कि शिक्षा के माध्यम से उनके प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए ।

महामहिम ने छत्तीसगढ़  कल्याण समिति  के सृजनकर्ताओं जिन्होंने आज से 50 साल पहले छत्तीसगढ़ में शिक्षा के विकास के  लिए कल्पना कर समिति गठन की थी को साधुवाद देते हुए कहा कि वर्तमान समिति भी  उनके कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और प्रतिबद्धता के आधार पर शिक्षा के उत्थान के पवित्र उद्देंश्यों  को पाने के लिए ईमानदारी से कार्य करते रहंेगी। इससे पहले महामहिम राज्यपाल ने माता सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण व समक्ष  दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ  किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ कल्याण समिति की ओर से क्षेत्र के कला, साहित्य व संगीत की विभूतियों ,समाज सेवकों, प्राचायो, प्राध्यापकगणों, कल्याण महाविद्यालय के पूर्व प्रतिभावान छात्रों, खिलाडि़यों को शाल-श्रीफल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। साथ ही इस अवसर पर समिति की स्वर्ण जयंती स्मारिका का विमोचन भी किया ।

पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. एस.के.पाण्डेय ने अपने सम्बोधन में कहा कि भिलाई का इस्पात नगरी  के साथ ही एजुकेशन हब के नाम से  भी देश  में पहचान है । उन्होने कहा कि  समिति ने शिक्षा के उद्देश्यों  को आत्मसात किया है। शिक्षण के क्षेत्र में इसी प्रकार का सहयोग आगे भी  मिलता रहे तो निश्चित ही इस समिति से संबंधित महाविद्यालय के छात्र शिक्षण के क्षेत्र में अग्रसर आगे बढ़ते रहेंगे । उन्होंने वर्तमान में शिक्षा के नित नये कार्यक्रम तैयार करने का  सुझाव भी दिया जिससे युवाओं में समाज के प्रति वे अपनी जवाबदेही तय कर सके। उन्होंने स्वर्ण जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ कल्याण समिति के सदस्यों को बधाई दी ।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि छ.ग. कल्याण समिति ने इन 50 साल में बिना किसी प्रकार का श्रेय लिए निःस्वार्थ मन से इस विश्वविद्यालय को जन्म दिया यह एक महान पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षण संस्थाएं युवकों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रही है। ऐसे युवाओं को उन्होंने ऊंचे-ऊंचे रेस वाले घोड़े की संज्ञा देते हुए कहा कि वे आज के शैक्षणिक दौर में सबसे आगे निगल कर बड़े बड़े पैकेज के साथ अच्छे-अच्छे संस्थाओं में अपनी सेवाएं देने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

छत्तीसगढ़ कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री  रामेश्वर प्रसाद मिश्रा ने अपने स्वागत भाषण में समिति के 50 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित किया। कल्याण महासविद्यालय भिलाई के प्रथम प्राचार्य श्री तोरण सिंह ठाकुर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार , समिति के सचिव श्री राधेलाल साहू, कोषाध्यक्ष श्री टी.एस. चैहान एवं अन्य  पदाधिकारी व सदस्यगण, कल्याण महाविद्यालय के प्राचार्य श्री जे.के.तिवारी एवं पूर्व प्राचार्यगण, प्राध्यापकगण  एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित थीं ।